मासिक गतिविधियाँ

December 2025

Supermoon Telescope Observation: 4 December 2025

Ajit Foundation organized a special telescope observation session of the Supermoon on 4 December 2025. The event saw enthusiastic participation from children and youth.

For many participants, this was their very first experience observing the Moon through a telescope. The clear view of lunar craters and surface details sparked curiosity and excitement among the young attendees. The session aimed to nurture scientific temper and inspire interest in astronomy among students and community members.


Tribute to Shri Bhavanishankar Vyas ‘Vinod’ & Discussion on His Literary Contribution

7 December 2025

Ajit Foundation organized a श्रद्धांजलि सभा (tribute meeting) in memory of the eminent literary figure Shri Bhavanishankar Vyas ‘Vinod’.

Speakers fondly remembered his inspiring personality and lifelong dedication to literature. Shri Govind Joshi shared memories of his time with Vyas ji, describing him as a rare and inspiring individual who constantly encouraged youth and women empowerment in literary spaces.

Shri Premnarayan Vyas, President of Prerna Pratishthan, spoke about learning discipline, time management, and structured planning of programs from him. Foundation Coordinator Sanjay Shrimali described him as a guiding light of Bikaner’s literary world and mentioned his role as editor of the Foundation’s literary magazine विकल्प.

Several other scholars, poets, writers, and social workers paid tribute, highlighting his immense contribution to nurturing new writers and enriching the cultural fabric of the region.


Monthly Dialogue: Mental Health & Stress Management

24 December 2025

Under its Monthly Dialogue series, Ajit Foundation organized a session on “Mental Health and Stress Management.”

Dr. Seema Tyagi, Assistant Professor at Swami Keshwanand Rajasthan Agricultural University, delivered the keynote address. She emphasized that stress has become increasingly common in modern life, especially when circumstances turn unfavorable.

She encouraged participants to maintain communication with loved ones and engage in self-reflection during stressful times. According to her, understanding one’s inner voice and staying positive helps in making meaningful life decisions.

During the interactive session, students were asked to write down their strengths and weaknesses. Dr. Tyagi stressed the importance of recognizing strengths and using them constructively, while working consciously to improve weaknesses.

The session concluded with a vote of thanks, acknowledging that such dialogues provide new direction and clarity to young minds.

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District-Level School Chess Tournament

27–28 December 2025

Ajit Foundation organized a two-day District-Level School Chess Tournament from 27 to 28 December 2025.

The tournament was inaugurated by renowned chess trainer Shankarlal Harsh, national chess player and philosopher Prof. Dr. Rajnarayan Vyas, and Vice President of Rajasthan Chess Association, Anil Boda.

Speakers highlighted that chess is not merely a game but a discipline that develops focus, patience, strategy, and mental resilience. They emphasized that chess strengthens decision-making abilities and supports the holistic development of children.

A total of 27 teams comprising 81 players participated in the competition.

Winners:
  • First Place: Aditya Chura, Pawan Ranga, and Aarav Jagingda (Kavi Hriday Chess Academy)
  • Second Place: Jainam Kothari, Kabir Acharya, and Nancy Boda (Bhanu Sir Team)

All participants were honored with mementos. The event successfully promoted sportsmanship, discipline, and intellectual growth among students.

नवम्बर


चल-पुस्तकालय

इस माह अजित फाउण्डेशन द्वारा नए चल-पुस्तकालय फेलोज़ के साथ चल-पुस्तकालय कार्यक्रम को पुनः प्रारम्भ किया गया। सुश्री दीक्षा व्यास एवं श्रीमती उषा बिस्सा सक्रिय रूप से हरिजन बस्ती एवं शीतला गेट क्षेत्रों में नियमित रूप से जाकर बच्चों के साथ पुस्तकों एवं खिलौनों के माध्यम से शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित कर रही हैं।

ई-वैन उपलब्ध न होने की स्थिति में भी मोटरसाइकिल के माध्यम से पुस्तकालय सामग्री पहुँचाकर चल-पुस्तकालय का संचालन निरन्तर जारी रखा गया। वर्तमान में ई-वैन निर्धारित समय पर दोनों स्थानों पर पहुँच रही है, जिससे गतिविधियाँ नियमित एवं सुव्यवस्थित रूप से संचालित हो रही हैं।

14 नवम्बर

दिनांक 14 नवम्बर, बाल दिवस के अवसर पर अजित फाउण्डेशन द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर चायनाण पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया गया। विद्यार्थियों को सामुदायिक पुस्तकालय का भ्रमण करवाया गया तथा बाल साहित्य की पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में युवा लेखक अमरदीप ने बच्चों को बाल साहित्य पढ़ने एवं प्रेरणास्पद कहानियों से सीख लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महापुरुषों की जीवनियाँ पढ़ने तथा उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

चायनाण पब्लिक स्कूल में मुख्यतः अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन विद्यार्थियों का संस्था से निरन्तर जुड़ाव बना हुआ है तथा वे प्रतिदिन सायं काल पुस्तकालय में पुस्तक पढ़ने एवं खेलने हेतु आ रहे हैं।

15 नवम्बर

दिनांक 15 नवम्बर को अजित फाउण्डेशन द्वारा बेसिक महाविद्यालय में एक दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी तथा बीकानेर की संस्कृति पर केन्द्रित फोटोग्राफ प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर संस्था द्वारा उपस्थित छात्र-छात्राओं को अजित फाउण्डेशन की विविध गतिविधियों एवं उद्देश्यों से रू-ब-रू करवाया गया। महाविद्यालय के अनेक छात्र-छात्राओं ने संस्था के कार्यों के प्रति रुचि दिखाई तथा भविष्य के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी हेतु सहमति व्यक्त की।

16 एवं 23 नवम्बर

इस माह अजित फाउण्डेशन द्वारा दो बाल फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। पहली फिल्म “मैं कलाम हूँ” का प्रदर्शन 16 नवम्बर को किया गया तथा दूसरी फिल्म “लंच बॉक्स” 23 नवम्बर को दिखाई गई।

“मैं कलाम हूँ” फिल्म एक गरीब बच्चे की शिक्षा के प्रति गहरी ललक को दर्शाती है तथा इसमें राजघराने और निम्न वर्ग के सामाजिक परिवेश को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म की एक विशेष बात यह रही कि इसके अधिकांश दृश्य बीकानेर में फिल्माए गए हैं तथा बीकानेर के कुछ कलाकारों ने भी इसमें अभिनय किया है। यह फिल्म सभी बच्चों को बहुत पसंद आई।

“लंच बॉक्स” फिल्म भी इसी प्रकार की संवेदनशील और प्रेरणादायक कहानी पर आधारित रही, जिसे बच्चों ने रुचि के साथ देखा और सराहा।

21 नवम्बर

दिनांक 21 नवम्बर को अजित फाउण्डेशन द्वारा हथाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार शिवराज छंगाणी के साहित्यिक योगदान पर केन्द्रित रहा। कार्यक्रम में उनके रचना संसार पर विस्तृत चर्चा की गई।

शिवराज छंगाणी मूलतः बीकानेर के निवासी थे। उनके द्वारा रचित राजस्थानी रेखाचित्र पूरे साहित्य जगत में विशेष रूप से प्रसिद्ध रहे हैं। इस अवसर पर उनके रेखाचित्रों के साथ-साथ उनकी कुछ विशिष्ट कविताओं का वाचन भी किया गया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने सराहा।

अक्टूबर

पाठ्यपुस्तकों से आगे: विज्ञान, रचनात्मकता और जिज्ञासा

बाल विज्ञान पुस्तक मेले के अंतर्गत अजित फाउंडेशन द्वारा विज्ञान पुस्तक प्रदर्शनी एवं सृजनात्मक विज्ञान लेखन पर एक प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

विज्ञान लेखक एवं साहित्यकार प्रमोद चमौली ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ अन्य रचनात्मक लेखन पढ़ना भी आवश्यक है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और सोच का विकास होता है। उन्होंने कहा, “पढ़ना एक कौशल है, एक कला है,” जिसे हर बच्चे को समझना चाहिए। उनके अनुसार विज्ञान हमें जिज्ञासु बनाता है, जीवन जीने की कला सिखाता है और हमारी सृजन शक्ति को विकसित करने के मार्ग दिखाता है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, शिक्षाविद् एवं समाजसेवी मनोज व्यास, ने कहा कि अच्छी पुस्तकें पढ़ने से सोच का दायरा बढ़ता है और समाज व देश की सेवा के नए अवसर मिलते हैं।

विक्टोरियस सी. सै. स्कूल की प्राचार्या रोहिणी ने पुस्तकालयों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि पाठक और पुस्तकालय एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता बताते हुए अजित फाउंडेशन जैसे संस्थानों के प्रयासों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

क्योंकि जिज्ञासा से ही ज्ञान की शुरुआत होती है।


संगीत में कबीर: तीन दिवसीय सत्संग कार्यशाला

अजित फाउंडेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कबीर सत्संग कार्यशाला में संगीत, साधना और आत्मचिंतन का सुंदर संगम देखने को मिला।

युवा संगीतकार संजय झुंझ ने कबीर की निर्गुण वाणी “मोको कहां ढूंढे रे बंदे…” प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि कबीर दास जी कहते हैं—ईश्वर बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर, हर सांस में विद्यमान है।

उन्होंने भजन “प्रार्थना दाता से प्रार्थना…” के माध्यम से सभी वर्गों के लिए मंगलकामना व्यक्त की। कार्यशाला के दौरान लोकेश झुंझ ने प्रशिक्षार्थियों को ढोलकी वादन का प्रारम्भिक प्रशिक्षण दिया और बताया कि किसी भी वाद्य को निरंतर अभ्यास से ही सीखा जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में संगीत समूह द्वारा कबीर वाणी “वारी जाऊं रे, बलिहारी जाऊं रे…”, मांड “सेणा रा बावरिया…” तथा मीरा का भजन “मीरा मेड़तली…” प्रस्तुत किया गया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

यह कार्यशाला संगीत के माध्यम से कबीर के विचारों को जीने और महसूस करने का एक यादगार अनुभव बनी।


12 अक्टूबर 2025

अजित फाउंडेशन द्वारा “हथाई” कार्यक्रम के अंतर्गत महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ पर एक सार्थक साहित्यिक गोष्ठी आयोजित की गई।

मुख्य वक्ता युवा साहित्यकार आनन्द पुरोहित ‘मस्ताना’ ने कहा कि निराला प्रगतिशील चेतना के कवि थे, जिनकी रचनाओं में छायावाद की स्पष्ट झलक मिलती है। उन्होंने बताया कि जब निराला ने लेखन आरम्भ किया, उस समय राष्ट्रभक्ति की कविताओं का बोलबाला था, जिससे उनकी रचनाओं को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। बावजूद इसके, अपने संघर्षपूर्ण जीवन और सशक्त लेखनी के बल पर उन्होंने साहित्य को ऐसी रचनाएँ दीं जो आज कालजयी मानी जाती हैं।

आनन्द छंगाणी ने कहा कि कविता को आत्मसात किए बिना न तो लेखन संभव है और न ही गहरी समझ का विकास।

कार्यक्रम में कविता-पाठ ने विशेष आकर्षण पैदा किया। प्रेम कुमार ने निराला की भावुक रचना “सरोज स्मृति” का पाठ किया। इसके बाद प्रतिभागियों द्वारा निराला की प्रसिद्ध कविताओं का सजीव वाचन किया गया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

यह गोष्ठी एक बार फिर याद दिला गई कि कविता सिर्फ पढ़ी नहीं जाती—वह महसूस की जाती है।


बच्चों के अधिकारों के लिए आवाज़: कानून और जिम्मेदारी पर संवाद

अजित फाउंडेशन और बी.जे.सी. जैन लॉ कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में बाल संरक्षण एवं कानून पर एक प्रेरक संवाद आयोजित किया गया।

मुख्य वक्ता एडवोकेट जुगल किशोर व्यास (निदेशक, चाइल्ड वेल्फेयर सोसायटी, बीकानेर) ने विद्यार्थियों से कहा कि हम रोज़ बच्चों को भीख मांगते, सड़क पर तमाशा करते या श्रम करते देखते हैं—लेकिन अक्सर चुप रह जाते हैं। बदलाव वहीं से शुरू होता है, जहाँ हम चुप रहना छोड़ते हैं।

उन्होंने बाल विवाह और बाल मजदूरी रोकने से जुड़े कानूनों, हेल्पलाइन और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उनका कहना था कि कानून की पढ़ाई के साथ सबसे पहली जिम्मेदारी नैतिकता की होती है। जब युवा इन मुद्दों पर आवाज़ उठाते हैं, तो समाज भी जुड़ता है।

इस अवसर पर अजित फाउंडेशन की गतिविधियों और छात्रों के जुड़ने के अवसरों पर भी चर्चा की गई। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनन्त किशोर जोशी ने कहा कि ऐसे सामाजिक प्रयास छात्रों में रचनात्मक सोच और सामाजिक चेतना विकसित करते हैं।

क्योंकि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कानून नहीं—हम सबकी जिम्मेदारी है।

सितंबर 2025

7 सितंबर 2025: टेलिस्कोप से चंद्रग्रहण का अवलोकन

7 सितंबर 2025 को अजित फाउंडेशन एस्ट्रोनॉमी क्लब द्वारा टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रग्रहण का सार्वजनिक अवलोकन आयोजित किया गया। कार्यक्रम रात 10:00 बजे आरंभ हुआ, जिसमें आगंतुकों को इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला। प्रतिभागियों के लिए मोबाइल फोटोग्राफी की भी व्यवस्था की गई थी। पूरे कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे, किशोर, युवा, पुरुष और महिलाएं फाउंडेशन में एकत्रित हुए और चंद्रमा के धीरे-धीरे ग्रहण में ढलने के अद्भुत दृश्य का आनंद लिया। यह कार्यक्रम आधी रात तक चला, जिसने प्रतिभागियों में खगोल विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और उत्साह को और बढ़ाया।

19 सितंबर 2025 : संवाद एवं पुस्तक प्रदर्शनी — जीवन पर्यन्त शिक्षा: शिक्षा नीति 2020

अजित फाउंडेशन की संवाद श्रृंखला के अंतर्गत 19 सितंबर 2025 को “जीवन पर्यन्त शिक्षा: शिक्षा नीति 2020” विषय पर चर्चा आयोजित की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् डॉ. मनमोहन सिंह यादव ने कहा कि शिक्षा हमें आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बनाती है। प्रत्येक शिक्षक का प्रथम कर्तव्य है कि वह अपने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और संस्कारों का विकास करे। उन्होंने कहा कि शिक्षक वह व्यक्ति है जो विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। शिक्षा नीति 2020 पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि इसकी सफलता के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है।

मुख्य वक्ता शिक्षाविद् एवं साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि जीवन पर्यन्त शिक्षा का अर्थ है जीवनभर सीखते रहना और समयानुसार स्वयं को अपडेट रखना। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक कौशल भी आवश्यक है ताकि हम जीवन में प्रगतिशील बने रहें। जोशी ने डिजिटल साक्षरता, मातृभाषा में अध्ययन और पर्यावरणीय संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि हमें अपने आसपास के निरक्षरों को साक्षर बनाना चाहिए ताकि हमारा राज्य पूर्ण साक्षर बन सके।

उन्होंने आधुनिक दुनिया में डिजिटल साक्षरता के महत्व और नई शिक्षा नीति के अंतर्गत मातृभाषा आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि जो लोग अब भी निरक्षर हैं, उन्हें साक्षर बनाने में सहयोग करें, ताकि हमारा राज्य और जिला पूर्ण साक्षरता प्राप्त कर सके।

संस्था के समन्वयक संजय श्रीमाली ने बताया कि इस कार्यक्रम में बी.एड. के विद्यार्थियों को विशेष रूप से शामिल किया गया, क्योंकि वे भविष्य के शिक्षक हैं। संवाद के साथ ही शिक्षा विषयक पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें देश के प्रमुख शिक्षाविदों की रचनाएँ उपलब्ध थीं।

20 सितंबर 2025 सुरभि संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में: लोककवि धनंजय वर्मा की स्मृति में ‘चितार’ कार्यक्रम

20 सितंबर 2025 को अजित फाउंडेशन सभागार में सुरभि संस्थान के सहयोग से लोककवि धनंजय वर्मा की स्मृति में “चितार” कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें श्री गोविन्द जोशी ने वर्मा जी की अमर रचनाओं का वाचन किया जो राजस्थान की लोक संस्कृति और जीवन की गहराइयों को अभिव्यक्त करती हैं। मुख्य अतिथि व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने वर्मा जी के रचना संसार पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने लेखन से ग्रामीण राजस्थान के जीवन को जीवंत बना दिया। इस अवसर पर पृथ्वीराज रतनू, ओमप्रकाश सारस्वत, और डॉ. अभय सिंह टाक ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में चार प्रमुख राजस्थानी साहित्यकारों — जानकीनारायण श्रीमाली, रवि पुरोहित, राजेन्द्र स्वर्णकार, और मनीषा आर्य सोनी — को उनके साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

27 सितंबर 2025 : संवाद — इतिहास और उसके स्रोतों की प्रासंगिकता : लोकप्रिय या यथोचित

27 सितंबर 2025 को अजित फाउंडेशन की मासिक संवाद श्रृंखला के अंतर्गत इतिहासवेत्ता एवं वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ. नितिन गोयल ने “इतिहास और उसके स्रोतों की प्रासंगिकता : लोकप्रिय या यथोचित” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास का अध्ययन मजबूत सामाजिक और नैतिक मूल्यों को विकसित करता है तथा इतिहास को समाज की सामूहिक स्मृति बताया। डॉ. गोयल के अनुसार, इतिहास का ज्ञान शिक्षा और राजनीतिक जीवन — दोनों के लिए वास्तविक प्रशिक्षण का कार्य करता है, जिससे व्यक्ति और समाज में पहचान की स्पष्ट भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि प्रमुख सामाजिक प्रक्रियाओं के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आयामों को समझना केवल इतिहास के गहन अध्ययन के माध्यम से ही संभव है।

डॉ. गोयल ने आगे कहा कि इतिहास का अध्ययन हमें अतीत के प्रति सम्मान और राष्ट्र से जुड़ाव की भावना विकसित करने में मदद करता है। ऐतिहासिक घटनाओं और महापुरुषों के योगदान को समझकर व्यक्ति निष्ठा, दृढ़ता, लोककल्याण और सामरसता जैसे मूल्यों को आत्मसात कर सकता है। उन्होंने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि आज के समय में जब फिल्म जगत और सोशल मीडिया इतिहास की धारणा को प्रभावित करते हैं, तब किसी भी ऐतिहासिक चित्रण को स्वीकार करने से पहले उसका स्रोत-आधारित अध्ययन करना आवश्यक है।

सत्र की अध्यक्षता करते हुए इतिहासकार डॉ. सुनीता स्वामी ने कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का क्रम नहीं है, बल्कि यह अतीत से जुड़ी मूल्यवान जानकारियों का भंडार है। यह हमें प्राचीन समाज और शासन व्यवस्था के जीवन का सार्थक परिचय कराता है। उन्होंने बताया कि प्रामाणिक ऐतिहासिक ज्ञान केवल पुरातात्त्विक, अभिलेखीय और मौखिक स्रोतों से ही प्राप्त किया जा सकता है, जो इतिहास की सत्यता और निरंतरता को बनाए रखते हैं।

अगस्त 2025

15 अगस्त 2025: मासिक संवाद : भारतीय संविधान और उसकी चुनौतियाँ

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को अजित फाउण्डेशन में “भारतीय संविधान और उसकी चुनौतियाँ” विषय पर संवाद आयोजित किया गया।

मुख्य वक्ता डॉ. अनन्त किशोर जोशी, प्राचार्य रामपुरिया लॉ कॉलेज, ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज पूरे देश में संविधान पर चर्चाएँ तो बहुत हो रही हैं, परन्तु बहुत कम लोग वास्तव में संविधान को पढ़ते या समझते हैं। अधिकांश लोग केवल सोशल मीडिया या अफवाहों के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं।

डॉ. जोशी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना और मुख्य सिद्धांतों का अध्ययन विद्यालय स्तर से ही प्रारम्भ होना चाहिए और महाविद्यालयों में इसे गहराई से पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संविधान देश का सर्वोच्च कानून है, और इसकी तीन मुख्य संस्थाएँ — विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका — नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करती हैं।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संविधान को समझें, उसके मूल्यों को आत्मसात करें और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लें।

मासिक हथाई - 24 अगस्त 2025

अजित फाउंडेशन द्वारा “हथाई” श्रृंखला के अंतर्गत 24 अगस्त 2025 को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ पर चर्चा आयोजित की गई।

कार्यक्रम में युवा साहित्यकार इमरोज नदीम ने दिनकर की प्रसिद्ध कृति ‘रश्मिरथी’ को उनकी श्रेष्ठ रचनाओं में से एक बताया और कहा कि यह हिंदी साहित्य में ऐतिहासिक योगदान है।

अरमान नदीम ने कहा कि आज के समय में साहित्यिक आलोचना कम हो रही है, जबकि दिनकर ने आलोचना को रचनात्मक दृष्टि से किया — न कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए। उन्होंने आज़ादी से पहले ब्रिटिश नीतियों की आलोचना की और स्वतंत्रता के बाद भी सरकार को जवाबदेह ठहराया।

सुरेश पुरोहित ने बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिनकर को “राष्ट्रकवि” की उपाधि दी थी। भारत-चीन युद्ध के समय उनकी देशभक्ति से प्रेरित रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। ‘रश्मिरथी’, जो महाभारत पर आधारित है, में उन्होंने कर्ण के चरित्र के साथ-साथ द्रौपदी पर हुए अन्याय को भी प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया।

रवि पुरोहित ने कहा कि दिनकर ने वीर रस की श्रेष्ठ कविताएँ लिखीं और साथ ही महिलाओं की वेदनाओं को भी संवेदनशीलता से उकेरा।

आनंद छंगाणी ने कहा कि दिनकर का काव्य संसार गहराई और जटिलता से भरा है, जिसमें उन्होंने समाज की पीड़ाओं और संघर्षों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है।

हथाई : 31 अगस्त 2025

अजित फाउंडेशन द्वारा “हथाई” श्रृंखला के अंतर्गत 31 अगस्त 2025 को “बीकानेर की संस्कृति में साहित्यिक योगदान” विषय पर चर्चा आयोजित की गई।

अरमान नदीम ने बादशाह हुसैन राणा साहब द्वारा रचित उर्दू रामायण का वाचन करते हुए बताया कि यह रचना तुलसीदास कृत रामायण को नज़्म (कविता) के रूप में प्रस्तुत करती है और इसमें सभी प्रमुख प्रसंगों का सुंदर उल्लेख है। उन्होंने कहा कि बीकानेर की पाटा संस्कृति आज भी देश और विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है।

सुरेश पुरोहित ने कहा कि बीकानेर के त्यौहार उसकी संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं और आज भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि ‘पिथल पाथल’ जैसी कृति ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान युवाओं में जोश और देशभक्ति की भावना जगाई थी।

शिक्षाविद् आनंद पुरोहित ने कहा कि बीकानेर के साहित्यिक इतिहास की शुरुआत भिथू सूजा की ‘राव जैतसी रो छंद’ से मानी जा सकती है, जबकि पृथ्वीराज राठौड़ की ‘वेलि किसन रूकमणि’ को “पंचम वेद” कहा जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन रचनाओं को संगीतमय और लयबद्ध रूप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।

इमरोज नदीम ने बताया कि बीकानेर के राजपरिवारों ने साहित्य, संगीत और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर युवाओं से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी बताया कि उर्दू रामायण की रचना के लिए महाराजा गंगासिंह जी ने बादशाह हुसैन राणा साहब को स्वर्ण पदक प्रदान किया था।

तेजेश जोशी ने कहा कि बीकानेर की संस्कृति में साहित्य के साथ-साथ संगीत का भी बड़ा योगदान रहा है। यहां के कई प्रतिभाशाली संगीतज्ञों ने भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बीकानेर का नाम रोशन किया है। उन्होंने बताया कि आज संगीत का उपयोग चिकित्सा के रूप में भी किया जा रहा है।अंत में अज़ीम हुसैन ने कहा कि बीकानेर की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता साम्प्रदायिक सौहार्द है। यहां के साहित्यकारों ने अपने लेखन में मेल-जोल और भाईचारे की भावना को प्रमुखता दी है।

जुलाई 2025

🗓️ जीवाश्म एवं पुस्तक प्रदर्शनी – 19 जुलाई

19 जुलाई को एक रोमांचक जीवाश्म एवं पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें पृथ्वी के प्राचीन अतीत की दुर्लभ झलकियाँ प्रस्तुत की गईं। इस आयोजन में जीवविज्ञान और डायनासोर युग से संबंधित नई पुस्तकों के साथ-साथ डॉ. राकेश हर्ष द्वारा संकलित एक अनोखी जीवाश्म संग्रह को प्रदर्शित किया गया। दर्शकों ने जुरासिक काल (लगभग 15–20 करोड़ वर्ष पूर्व) और टरसरी काल (लगभग 7–9 करोड़ वर्ष पूर्व) के वास्तविक जीवाश्म देखे। जुरासिक काल के जीवाश्म झारखंड से एकत्र किए गए थे, जिनमें अनावृतिबीज पादप (जैसे देवदार, जिनके बीज खुले होते हैं) और टेरिडोफाइटा (फर्न और उनके संबंधी) शामिल थे। टरसरी काल के जीवाश्म बीकानेर से प्राप्त हुए, जो आवृतिबीज पादपों (फूल वाले पौधे) की लकड़ी के रूप में जीवाश्मित रूप में संरक्षित हैं। कई छात्रों और आगंतुकों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने इतने प्राचीन जीवन के प्रत्यक्ष प्रमाण देखे — यह एक ऐसा अनुभव था जो इतिहास को जीवंत बनाता है और विज्ञान को स्पर्श योग्य।

20 जुलाई – संवाद: जीवाश्म – बीते युग की कहानी

20 जुलाई को आयोजित संवाद में जीव विज्ञानी प्रो. राकेश हर्ष ने “जीवाश्म: बीते युग की कहानी” विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि जीवाश्म—अर्थात प्राचीन जीवों के अवशेष या छाप—हमें जीवन के क्रमिक विकास और चट्टानों की आयु जानने में सहायता करते हैं। अधिकांश जीवाश्म पौधों और प्राणियों के कठोर भागों से बनते हैं, जबकि कुछ दुर्लभ रूप से संपूर्ण जीव ग्लेशियरों में संरक्षित मिलते हैं। करोड़ों वर्ष पूर्व जब जीव-जंतु पृथ्वी की हलचलों के कारण मिट्टी में दब गए और हवा या पानी के संपर्क में नहीं आए, तो वे धीरे-धीरे जीवाश्म में परिवर्तित हो गए। प्रो. हर्ष ने बताया कि उन्होंने बीकानेर क्षेत्र से हजारों जीवाश्म एकत्र किए हैं, जिनमें 32 नई प्रजातियाँ शामिल हैं। कुछ जीवाश्म सामान्य दृष्टि से देखे जा सकते हैं, जबकि कई इतने सूक्ष्म होते हैं कि उन्हें माइक्रोस्कोप से देखना पड़ता है। उन्होंने ट्रेस जीवाश्मों—जैसे पैरों के निशान और छापें—का भी उल्लेख किया, जो extinct जीवों की बाहरी संरचना की जानकारी देते हैं। संवाद में उन्होंने जुरासिक काल से लेकर टरसरी काल तक के जीवाश्मों की विस्तृत जानकारी साझा की, जिससे श्रोताओं को पृथ्वी के प्राचीन इतिहास की एक रोचक और ज्ञानवर्धक झलक मिली।

27 जुलाई – मुंशी प्रेमचंद की कहानियों पर चर्चा

27 जुलाई को अजित फाउंडेशन की पहल “हथाई” के अंतर्गत आयोजित पठन सत्र में बीकानेर के युवाओं ने हिंदी साहित्य के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद की कहानियों पर गंभीर और उत्साही चर्चा की। आनन्द पुरोहित ने प्रेमचंद की कहानियों को तीन चरणों—आदर्शवाद, आदर्शवाद व यथार्थवाद का मिश्रण, और पूर्ण यथार्थवाद—में विभाजित करते हुए बताया कि उस समय देश में स्वतंत्रता संग्राम चल रहा था, जिससे उनकी कहानियों में देशभक्ति की भावना भी झलकती है। प्रेमकुमार मेघवाल ने बताया कि प्रेमचंद ने अपने समय के सामाजिक परिवेश को आमजन तक पहुँचाने का कार्य किया, जबकि सुरेश पुरोहित ने उनके लेखन में नैतिक मूल्यों और स्त्री विमर्श की सशक्त उपस्थिति पर प्रकाश डाला। युवा प्रतिभागियों ने भी विभिन्न कहानियों पर अपने विचार रखे: प्रतीक ने “ईदगाह” की सार्वभौमिक संवेदना की चर्चा की, अर्पिता स्वामी ने “नमक का दरोगा” में भ्रष्टाचार और न्याय के चित्रण की सराहना की, और तनिषा सुथार ने “कफन” में स्त्री विमर्श और सामाजिक विसंगतियों की विवेचना की। कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि सभी प्रतिभागी 30 वर्ष से कम आयु के थे, जिनमें दो किशोरी बालिकाओं ने कहानियों का वाचन कर अपनी बात साझा की—जिससे यह आयोजन एक जीवंत और प्रेरणादायी साहित्यिक अनुभव बन गया।

जून 2025

चहल-पहल ने कोलकाता की एक शिक्षिका को किया प्रेरित

चहल-पहल, जो कि फाउंडेशन की ऑनलाइन मासिक बाल पत्रिका है, ने जून 2025 में एक रचनात्मक पहल को प्रेरित किया। कोलकाता की एक स्कूल शिक्षिका, श्रीमती शर्मिला जालान ने ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान पत्रिका के कुछ अंक अपने विद्यार्थियों को ऑनलाइन भेजे और उनसे अनुरोध किया कि वे उन्हें पढ़कर उस पर रचनात्मक लेखन करें। इस गतिविधि में 15 बालिकाओं ने भाग लिया और अपने लेख अपनी शिक्षिका को सौंपे। इनमें से दो विद्यार्थियों को “हिन्दी हीरो” बैज से सम्मानित किया जाएगा। स्कूल ने हिन्दी भाषा के प्रति इस जागरूक प्रयास की सराहना की, और इस गतिविधि पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट चहल-पहल में प्रकाशित की गई है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि चहल-पहल का प्रभाव अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल तक पहुँच रहा है।

बच्चों के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्में

फाउंडेशन के ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम के अंतर्गत इस माह बच्चों के लिए तीन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। पहली फिल्म “द साउंड ऑफ म्यूजिक” एक ऐसे बच्चे की कहानी पर आधारित थी जो सुन नहीं सकता, लेकिन उसने एक हजार से भी अधिक म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स बजाने में महारत हासिल की है। दूसरी फिल्म “पी.टी.एम.” स्कूल में होने वाली पेरेंट-टीचर मीटिंग्स के दौरान अभिभावकों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित थी। तीसरी फिल्म “मैं अब्दुल कलाम हूं” डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन और प्रेरणा को दर्शाने वाली डॉक्यूमेंट्री थी। तीनों ही फिल्में सन्देशात्मक और रोचक थीं। इन प्रस्तुतियों में बच्चों के साथ-साथ कुछ किशोरों और युवाओं ने भी भाग लिया।

संगीत शिविर

संस्था की ग्रीष्मकालीन गतिविधियों के अंतर्गत जून माह में 25 दिवसीय संगीत शिविर का आयोजन किया गया, जो सभी प्रतिभागियों के लिए एक अविस्मरणीय और समृद्ध अनुभव रहा। 10 से 50 वर्ष की आयु के 30 से 35 प्रतिभागी प्रतिदिन संस्था के सभागार में एकत्र होते और सत्संग, राजस्थानी लोकगीत, कबीर वाणी, ग़ज़लें, मीराबाई के भजन जैसे कार्यक्रमों में भाग लेते। प्रतिदिन रियाज़ और कुछ नया सीखना इस शिविर की खासियत रही। इस संगीत शिविर का संचालन पं. पुखराज शर्मा ने किया, जो एक अनुभवी और समर्पित संगीत शिक्षक हैं। उन्होंने न केवल गायन सिखाया बल्कि संगीत के विभिन्न क्षेत्र, उसके व्यावसायिक अवसर, और संगीत की मनोवैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय उपयोगिता के बारे में भी प्रतिभागियों को विस्तार से बताया। शिविर के अंतिम दिन “संगीत संध्या” का आयोजन किया गया जिसमें सभी प्रतिभागियों ने व्यक्तिगत और समूह प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अनुभव के बाद कई प्रतिभागियों ने संगीत को गंभीरता से आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है और वे पं. पुखराज जी से नियमित रूप से संगीत सीखना चाहेंगे। इस शिविर के माध्यम से संस्था के पास अब एक तैयार टीम है जो भविष्य में होने वाले संगीत आयोजनों में भाग ले सकेगी। पं. पुखराज जी ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि वे सप्ताह में एक दिन संस्था में नियमित संगीत कक्षा लेने के लिए तैयार हैं।

मई 2025

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ऑनलाइन संवाद

📅 Date: May 11, 2025

प्रो. भुवनेश जैन फिलहाल पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय के भौतिकी एवं खगोल विज्ञान विभाग में नेचुरल साइंसेज़ के अनेनबर्ग प्रोफेसर हैं, और वहां डेटा ड्रिवन डिस्कवरी इनिशिएटिव तथा सेंटर फॉर पार्टिकल कॉस्मोलॉजी के सह-निदेशक भी हैं।

एक रोचक ऑनलाइन संवाद में प्रो. जैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की जटिलताओं को बेहद सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि ए.आई. किस तरह कार्य करता है, चित्रों व शब्दों को कैसे पहचानता है और मानव प्रश्नों के उत्तर कैसे देता है।


🪑 ‘हथाई’ कार्यक्रम का शुभारंभ

दिनांक: 25 मई 2025

विषय: विजयदान देथा की कहानियाँ

अजित फाउण्डेशन ने एक नया मासिक साहित्यिक संवाद प्रारंभ किया है जिसका नाम है “हथाई” — यह एक अनौपचारिक परिचर्चा है जिसमें किसी विशेष साहित्यिक या सामाजिक विषय पर चर्चा की जाती है।

Highlights from the first Hathai:

  • “आशा अमरधन” पर प्रस्तुति
  • वैभव ने “बेटा किसका” पर चर्चा की, जिसमें सामाजिक जटिलताओं की बात की गई
  • • आनन्द कुमार छंगाणी ने “पुटिया चाचा” की मनोवैज्ञानिक गहराई पर प्रकाश डाला

“विजयदान देथा की कहानियाँ कालजयी सांस्कृतिक धरोहर हैं।” – कमल रंगा

वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने देथा जी के साहित्यिक योगदान को रेखांकित करते हुए “बाता री फुलवारी” को महत्वपूर्ण लोकसाहित्य संग्रह बताया।

📖 संदर्भ पुस्तक:

“बोरूदा डायरी” — मालचन्द तिवाड़ी द्वारा रचित यह पुस्तक देथा जी के जीवन व सरल व्यक्तित्व पर आधारित है।

👥 कई युवा प्रतिभागियों ने भविष्य की हथाई में सक्रिय सहभागिता की इच्छा जताई।



🎵 ग्रीष्मकालीन संगीत शिविर का शुभारंभ

📅 दिनांक: 26 मई 2025 – 26 जून 2025

🎶 प्रमुख प्रशिक्षक: पं. पुखराज शर्मा

🧑‍🤝‍🧑 प्रतिभागी: आयु 10–50 वर्ष (42 प्रतिभागी)

अजित फाउण्डेशन का वार्षिक ग्रीष्मकालीन संगीत शिविर पूरे उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ, जिसमें:

  • प्रतिभागियों को आयु अनुसार तीन समूहों में बाँटा गया: बच्चे, किशोर, युवा
  • संगीत के सैद्धांतिक व व्यावहारिक पक्षों पर अभ्यास
  • दैनिक सरगम अभ्यास,
  • सरस्वती वंदना, हारमोनियम, और तबला प्रशिक्षण

🎼 तबला प्रशिक्षण में योगदान: श्री नवल श्रीमाली

🎨 सायंकालीन बाल गतिविधियाँ

🕓 समय: प्रतिदिन, सायं 4:00 बजे से

📍 स्थान: फाउण्डेशन सभागार

बच्चों के लिए प्रतिदिन रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • खिलौनों के साथ शिक्षण
  • चित्रकला व कला-कौशल गतिविधियाँ

यह सत्र बच्चों में सृजनात्मकता और आत्म-अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करते हैं।

अप्रैल 2025

यात्राओं का मर्म और मायने: प्रोफेसर शेखर पाठक द्वारा वार्षिक अजित फाउंडेशन संवाद

इतिहासकार और 'पहाड़' संस्था के संस्थापक डॉ. शेखर पाठक ने 12 अप्रैल, 2025 को अजित फाउंडेशन, बीकानेर में "यात्राओं का मर्म और मायने" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि यात्राएँ व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में कैसे योगदान देती हैं, विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र के संदर्भ में। डॉ. पाठक ने 1974 से आयोजित अनोखे अस्कोट-आराकोट दशक यात्रा अभियानों पर प्रकाश डाला, जिन्होंने पिछले पांच दशकों में उत्तराखंड के पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों का व्यवस्थित रूप से दस्तावेज़ीकरण किया है। हर दस साल पर होने वाली ये यात्राएँ हिमालयी बदलावों का एक दुर्लभ अनुदैर्ध्य अध्ययन प्रदान करती हैं, जो किसी अन्य शोध पद्धति से संभव नहीं है। सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने पहाड़ी समुदायों और पारिस्थितिकी तंत्रों को समझने में ऐसे निरंतर दस्तावेज़ीकरण के महत्व पर चर्चा की।

मार्च 2025

त्रिभाषा काव्य पाठ एवं काव्य यात्रा | 9 मार्च 2025

अजित फाउंडेशन सभागार में एक रंगारंग साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें हिन्दी, राजस्थानी और उर्दू भाषाओं में कवयित्रियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं और अपनी काव्य यात्रा की झलकियाँ साझा कीं। डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’ ने हिन्दी में अपनी सद्य रचना “नहीं हैं अज्ञेय” के माध्यम से साहित्यिक शिखर पुरुष अज्ञेय को श्रद्धांजलि दी, इसके बाद पर्यावरण संरक्षण पर आधारित “कटता है जब भी हरा पेड़” और महाभारत की गांधारी पात्र पर केन्द्रित लम्बी कविता “गांधारी” के माध्यम से महिला की दुविधा को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया। शारदा भारद्वाज ने उर्दू में साम्प्रदायिक सौहार्द पर आधारित अपनी नज़्म “खुदा हर चेहरे पर मासूमियत…” से वाचन की शुरुआत की और एक अनूठी उर्दू सरस्वती वंदना के माध्यम से आध्यात्मिक विषयों पर अपनी नवाचारी शैली को सामने रखा। डॉ. कृष्णा आचार्य ने राजस्थानी में “माता म्हारी सुरस्त है, मांड मांडणा आखर झोली भर दे” जैसी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बेटियों पर आधारित “काळजे री कोर बेटिया” कविता ने भावनात्मक प्रभाव छोड़ा, और होळी व प्रकृति के रंगों से सजी “प्रीत रा परिन्दा गासी प्रीत रा गीतळडा” ने पूरे वातावरण को उल्लास से भर दिया। यह कार्यक्रम भाषाई विविधता, काव्यात्मक सृजनशीलता और साहित्य में महिलाओं की सशक्त उपस्थिति का सुंदर उत्सव रहा। Hindi, Rajasthani, and Urdu. The event featured accomplished women poets who shared both their verses and the stories behind their poetic journeys. Representing Hindi, Dr. Renuka Vyas ‘Neelam’ presented her recent poem “Nahin Hain Agyeya”, paying tribute to the literary giant Agyeya, followed by the environmentally-themed “Katta Hai Jab Bhi Hara Ped”, and the powerful long poem “Gandhari”, centered on the inner dilemmas of the Mahabharata’s Gandhari. In the Urdu segment, Sharada Bhardwaj opened with her nazm “Khuda Har Chehre Par Masoomiyat…”, reflecting on communal harmony and human innocence, and presented an Urdu Saraswati Vandana, showcasing her creative innovation in spiritual poetry. Dr. Krishna Acharya, reciting in Rajasthani, mesmerized the audience with “Mata Mhari Surast Hai, Maand Maandna Aakhar Jholi Bhar De”, and her touching poem on daughters “Kaalje Ri Kor Betiyan”. Her Holi-inspired song “Preet Ra Parinda Gaasi Preet Ra Geetalda”beautifully captured the mood of the season and nature’s joyful rhythms. The event was a celebration of linguistic diversity, poetic expression, and the creative voice of women in literature.

फ़रवरी 2025

बाल साहित्य की दशा एवं दिशा: पुस्तक प्रदर्शनी और संवाद (15-16 फरवरी 2025)

बाल साहित्य की दशा एवं दिशा: पुस्तक प्रदर्शनी और संवाद (15-16 फरवरी 2025)

स्थानीय नालंदा स्कूल में 15 फरवरी को बाल साहित्य की नवीन पुस्तकों की प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्कूल प्रशासन ने आयोजन में पूरा सहयोग दिया और छात्रों को पुस्तकों के प्रति जागरूक किया। प्रदर्शनी के दौरान बच्चों को पुस्तकालय व अन्य साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी दी गई और अगले दिन होने वाले संवाद कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया।

16 फरवरी 2025 को संस्था सभागार में “बाल साहित्य: दशा एवं दिशा” विषय पर एक संवाद आयोजित किया गया। वरिष्ठ बाल साहित्यकार आशा शर्मा ने कहा कि आज बाल साहित्य तो लिखा जा रहा है, लेकिन पढ़ने की प्रवृत्ति कम होती जा रही है। बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें साहित्य से जोड़ने के लिए सामाजिक मंचों पर चर्चाएँ आयोजित करनी चाहिए।

व्यंग्यकार डॉ. अजय जोशी ने बाल साहित्य की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए पूछा कि क्या बच्चों की रुचि और उनकी भाषा को ध्यान में रखकर साहित्य रचा जा रहा है? उन्होंने बाल साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे बच्चों को आकर्षित करने वाले विषयों पर गुणवत्ता युक्त रचनाएँ तैयार करें।

इस आयोजन ने बाल साहित्य के महत्व और भविष्य पर गंभीर मंथन किया और बच्चों को पढ़ने के प्रति प्रेरित करने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।

शिवराज छंगाणी: प्रथम पुण्यतिथि स्मृति कार्यक्रम (22 फरवरी 2025)

प्रसिद्ध राजस्थानी साहित्यकार शिवराज छंगाणी की प्रथम पुण्यतिथि पर 22 फरवरी 2025 को एक भावपूर्ण स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी एवं राजस्थानी की प्रख्यात कवयित्री डॉ. कृष्णा आचार्य ने उनके व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि शिवराज छंगाणी ने साधारण से असाधारण तक की यात्रा तय की। उनका स्वभाव अत्यंत विनम्र और स्नेहपूर्ण था। उन्होंने विशेष रूप से रेखाचित्रों के माध्यम से राजस्थानी साहित्य में अपनी अमिट छाप छोड़ी, जो आज भी साहित्य जगत में विशिष्ट स्थान रखते हैं। एक उत्कृष्ट लेखक, संपादक और राजस्थानी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने राजस्थानी साहित्य को नई पहचान दी, विशेष रूप से कुंडलियों के माध्यम से। इस अवसर पर कई साहित्यकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। युवा साहित्यकार जुगल किशोर पुरोहित ने राजस्थानी भाषा की पहचान पर केंद्रित अपना स्वलिखित गीत प्रस्तुत किया, जिसने सभी को भावविभोर कर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ने छंगाणी के योगदान को अनुपम बताते हुए कहा कि उनकी लेखनी की खुशबू आज भी फैली हुई है। कमल रंगा ने उन्हें एक आदर्श व्यक्तित्व बताया और कहा कि वे केवल एक महान लेखक ही नहीं, बल्कि एक मौन साधक भी थे। कवि विशन मतवाला ने शिवराज छंगाणी को एक विशाल आकाश की तरह बताया, जिसके नीचे अन्य साहित्यकार तारे बनकर चमकते हैं। इस अवसर पर युवा कवि आनंद छंगाणी ने “कभी आओ कविता में” शीर्षक से उन पर समर्पित कविता प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन राजस्थानी साहित्य और शिवराज छंगाणी की अमूल्य साहित्यिक विरासत पर विचार-विमर्श का एक सुअवसर बना, जिससे यह सिद्ध हुआ कि उनकी रचनाएँ और विचार साहित्य प्रेमियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

स्वतंत्रता सेनानी शौकत उस्मानी पर दो दिवसीय कार्यक्रम 24-25 फरवरी 2025

अजित फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम “स्वतंत्रता सेनानी: शौकत उस्मानी” के तहत 24 फरवरी 2025 को पुस्तक एवं फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन आकाशवाणी बीकानेर के वरिष्ठ उद्घोषक प्रमोद कुमार शर्मा ने किया। इस प्रदर्शनी में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक तस्वीरें और शौकत उस्मानी द्वारा लिखित तथा उन पर लिखित पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। इसके बाद उर्दू एवं हिंदी साहित्यकार असद अली ‘असद’ द्वारा उनके जीवन पर आधारित रेडियो रूपक प्रसारित किया गया, जिसमें उनकी बाल्यावस्था से क्रांतिकारी बनने तक की पूरी यात्रा को दर्शाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रमोद कुमार शर्मा ने शौकत उस्मानी को क्रांति की मशाल बताया और उनके साहित्यिक योगदान को भी सराहा। प्रदर्शनी का आयोजन शौकत उस्मानी के प्रौत्र सलीम उस्मानी के सहयोग से संभव हुआ। 25 फरवरी 2025 को “शौकत उस्मानी: एक युग” विषय पर संवाद श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें समाजसेवी अविनाश व्यास ने उनके जीवन के संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1901 में जन्मे शौकत उस्मानी ने 1920 में बीकानेर छोड़ दिया और अफगानिस्तान होते हुए रूस पहुंचे, जहां वे भारतीय क्रांतिकारियों से जुड़े। ब्रिटिश सरकार द्वारा कई बार गिरफ्तार किए गए उस्मानी कुल 16 वर्षों तक जेल में रहे। आजादी के बाद उन्होंने इंग्लैंड में रहकर सामाजिक व क्रांतिकारी विषयों पर पुस्तकें लिखीं। 1920 में बीकानेर छोड़ने के बाद 1976 में जब वे लौटे, तो उनका नागरिक अभिनंदन किया गया। यह महान स्वतंत्रता सेनानी 26 फरवरी 1978 को दुनिया से विदा हो गया।

जनवरी 2025

मोहम्मद उस्मान आरिफ: साहित्य, समाज और स्मृतियाँ

अजित फाउंडेशन द्वारा 10 से 13 जनवरी 2025 तक प्रसिद्ध साहित्यकार और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, मोहम्मद उस्मान आरिफ की पुस्तकों और उनसे जुड़ी दुर्लभ तस्वीरों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। उद्घाटन प्रो. भंवर भादानी ने किया, जिन्होंने आरिफ साहब के साहित्य को सामाजिक चेतना और देशभक्ति का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में बीकानेर के रचनाकारों ने उनकी ग़ज़लें और कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों ने भी भाग लिया। 12 जनवरी को “उर्दू के अलमबरदार मोहम्मद उस्मान आरिफ” विषय पर व्याख्यान हुआ, जिसमें उनके साहित्य और समाज में योगदान पर चर्चा हुई। समापन पर डॉ. फखरुन्निसा ने उनके साहित्यिक, शैक्षिक और राजनीतिक योगदान को प्रेरणादायक बताया और उनके नाम पर पुरस्कार स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नारी लेखन एवं समाज: सृजन, संघर्ष और संवाद

अजित फाउंडेशन द्वारा 18 और 19 जनवरी 2025 को “नारी लेखन एवं समाज” विषय पर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहले दिन सामुदायिक पुस्तकालय में महिला कवयित्रियों की पुस्तकों की प्रदर्शनी आयोजित हुई, जिसका उद्घाटन साहित्यकार डॉ. कृष्णा आचार्य ने किया। 19 जनवरी को इसी विषय पर एक व्याख्यान आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य वक्ता डॉ. बसंती हर्ष ने महिलाओं के साहित्यिक योगदान और समाज में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद महिलाओं ने साहित्य की विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है। डॉ. कृष्णा आचार्य ने नारी सृजनात्मकता के ऐतिहासिक महत्व और समाज पर उसके प्रभाव को रेखांकित किया। वरिष्ठ साहित्यकार सरोज भाटी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि वैदिक काल से लेकर आज तक नारी लेखन ने समाज को नई दिशा दी है और यह साहित्यिक धारा निरंतर प्रवाहमान है।

दिसंबर 2024

जिला स्तर विद्यालय शतरंज प्रतियोगिता 2024: 30-31 दिसंबर 2024

अजित फाउण्डेशन ने 30 और 31 दिसंबर 2024 को अपनी 20वीं वार्षिक जिला स्तरीय स्कूली शतरंज प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया। यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम पिछले दो दशकों से इस क्षेत्र में युवा शतरंज के विकास का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है।

उद्घाटन समारोह

प्रतियोगिता का उद्घाटन प्रसिद्ध शतरंज प्रशिक्षक शंकरलाल हर्ष, वरिष्ठ शतरंज खिलाड़ी अनिल बोड़ा, युवा चिकित्सक डॉ. प्रवीण प्रजापत और युवा शतरंज खिलाड़ी अक्षय व्यास सहित विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए शतरंज खिलाड़ी और प्रशिक्षक शंकरलाल हर्ष ने शतरंज की दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभुत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने वैश्विक शतरंज रैंकिंग में अपनी स्थिति में नाटकीय रूप से सुधार किया है, जो निचले पायदान से अब शीर्ष देशों में गिना जाता है।

विशेषज्ञ अंतर्दृष्टि

प्रतिष्ठित शतरंज प्रशिक्षक अनिल बोडा ने शतरंज और बच्चों के समग्र विकास के बीच सीधे संबंध पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कैसे यह खेल गणितीय क्षमताओं को बढ़ाता है और युवा प्रतिभागियों के साथ शतरंज की तकनीकों और अंकन के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।

मुख्य अतिथि डॉ. प्रवीण प्रजापत ने शतरंज के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य लाभों के बारे में बात की और इसे जीवन में सफलता का मार्ग बताया। युवा शतरंज खिलाड़ी अक्षय व्यास ने कहा कि शतरंज पूरी तरह अनुशासन का खेल है जो बुद्धि का परीक्षण करता है और व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

समापन समारोह

समापन समारोह में बीकानेर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक के निजी सचिव नरेश श्रीमाली ने भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रतिभागियों को हार से निराश होने के बजाय अपनी गलतियों से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण आचार्य ने अभिभावक-बाल संचार के महत्व तथा चरित्र निर्माण में शैक्षिक कहानी कहने की भूमिका पर जोर दिया।

टूर्नामेंट परिणाम

लड़कों की श्रेणी

  • पहले स्थान पर: Team from Perfect Chess Academy (Uday, Khushal, and Gaurav Poonia)
  • द्वितीय स्थान: कृष्णा पब्लिक स्कूल, उदयरामसर की टीम (किशन पंचारिया, महेश एवं अमित जाखड़): Team from Krishna Public School, Udayramsar (Kishan Pancharia, Mahesh, and Amit Jakhad)

लड़कों की श्रेणी

  • विजेता (रनिंग ट्रॉफी): कवि हृदय चेस एकेडमी की टीम (नेन्सी बोड़ा, हीर तंवर एवं कीर्ति व्यास): Kavi Hriday Chess Academy team (Nancy Boda, Heer Tanwar, and Kirti Vyas)
  • Runners-up: Government Harso Ka Chauk team (Anjali Vyas, Monika Upadhyay, and Rajni Kumari)

प्रतिभागिता विवरण

The tournament saw an impressive turnout with 100 participants:

  • प्रतिभागिता विवरण
  • बालिका वर्ग: 21 प्रतिभागी

इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में उनके उत्साह और भागीदारी को मान्यता देते हुए सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

टूर्नामेंट की सफलता स्कूली छात्रों के बीच शतरंज के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है और जिले में युवा शतरंज प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए अजीत फाउंडेशन की प्रतिबद्धता को पुष्ट करती है।

हरीश भादानी के कार्यों का उत्सव

हरीश भादानी (1933–2009): एक सप्ताह तक चला स्मृति कार्यक्रम बीकानेर के प्रसिद्ध कवि और अजित फाउंडेशन के मित्र हरीश भादानी को अजित फाउंडेशन में एक सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रम में श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में भादानी की पुस्तकों और फोटोग्राफ की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन कवि सरल विशारद, कलाकार सन्नू हर्ष, और सामाजिक कार्यकर्ता कविता व्यास ने किया। “हरीश भादानी: स्मृतियों के वातायन से” शीर्षक से 22 दिसंबर 2024 को हिंदी और राजस्थानी के मूर्धन्य साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। तिवाड़ी ने अपनी पहली मुलाकात का जिक्र किया, जो श्रीडूंगरगढ़ में एक हिंदी प्रचार समिति के आयोजन में हुई थी। उन्होंने भादानी की काव्य धरोहर पर चर्चा करते हुए कहा: • उनकी रचनाओं में दार्शनिक जिज्ञासाएं और आध्यात्मिकता का समावेश है। • उन्होंने गीतों को प्राथमिकता दी क्योंकि वे उन्हें सबसे अधिक प्रभावी माध्यम मानते थे। • भादानी ने पारंपरिक हिंदी व्याकरण के बंधनों से मुक्त होकर अपनी रचनाओं में एक अनोखी भाषाई शैली विकसित की। कार्यक्रम में 21 दिसंबर 2024 को हरीश भादानी का यूट्यूब साक्षात्कार भी प्रदर्शित किया गया। यह कार्यक्रम हरीश भादानी की रचनात्मकता, विचारधारा और काव्य-धरोहर को सम्मानित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक प्रेरणादायक प्रयास था।

July 2024

Art and Craft Workshop

Chess workshop

Theatre workshop

मई 2024

ड्राइंग कार्यशाला, मई 2024